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शहर की लड़की को चोदा

दोस्तों मेरे सबसे प्यारे मेरे सबसे छोटे मामा जी है.. जो मेरे लिए एक रिश्तेदार से बड़कर मेरे एक बहुत अच्छे दोस्त है Shaher ki Chhori. इस बार जब में अपने मामा के घर गया तो मामा बहुत ही खुश हुए और उनकी ख़ुशी का तो मानो कोई ठिकाना ही नहीं था और में तो जैसे इतना खुश कभी होता ही नहीं था.. जितना मामा के यहाँ पर होता था.

फिर एक दिन में और मामा सुबह सुबह फ्रेश होने के लिए खेत पर जा रहे थे तो रास्ते में एक लड़की मिली और उसका नाम सीमा था Shaher ki Chhori और वो क्या गजब की बला थी. मेरी एक ख़ासियत थी कि में और मामा एक ही लोटा लेकर जाते थे और उस लोटे को मामा ही लेकर चलते थे.. में तो बस जैसे राजा साहब बनकर चलता था. उस लड़की को देखकर मेरे मुहं से लार निकल पड़ी और में किसी भूखे जानवर की तरह उसे ताकने लगा और धीरे से मामा से पूछा कि यार यह कौन सी बला है तो मामा ने कहा कि चुपकर.. यह भी तेरी तरह अपने चाचा के घर पर शहर से आई है Shaher ki Chhori तो मैंने कहा कि अब तो जोड़ी खूब जमेगी, यह भी शहर की और में भी शहर का, क्या बात है?

तो मामा ने कहा कि क्या कह रहे हो यार, में इतने दिन लाईन पर लाईन दे रहा हूँ और मुझे तो घास तक नहीं डाली.. चल शर्त लगाते है और अगर यह तुझसे पट गयी तो मेरी तरफ से टाकीज में फिल्म तो मैंने कहा कि ठीक है मामू और अगले दिन में सुबह जल्दी उठ गया और सुन्दर सा सूट पहनकर सुबह सुबह मामा के खेत पर अकेला जाने को तैयार हो गया.. या फिर यूँ कहिए कि मैंने सीमा को उस तरफ जाते हुए देख लिया था Shaher ki Chhori.

में मामा को सोता हुआ छोड़कर उसके पीछे चला गया और थोड़ी दूरी पर ही जब मैंने सुनसान रास्ता देखा तो मैंने आवाज़ लगाई.. हाय हैल्लो तुम्हारा नाम क्या है? फिर पहले तो वो कुछ नहीं बोली और जब दोबारा मैंने कहा कि क्या कम सुनाई देता है तो उसने पलटकर कहा कि में गावं के लड़को से बात नहीं करती.

फिर उसका पलटना, क्या सूरत थी और उसका एकदम गोल चेहरा और एकदम गौरा रंग अगर धूल का एक कण भी चिपक जाए तो साफ साफ दिख जाए कि कुछ दाग लगा है और नाक में सानिया मिर्ज़ा जैसी वाली गजब की मस्त और बूब्स तो अब क्या बताऊँ कि बस सीने पर दो टेनिस की बॉल की तरह, जब चलती तो लगता था कि उछलकर कहीं बाहर ना निकल पड़े और कंधे तक कटे हुए बाल. Shaher ki Chhori फिर मैंने कहा कि जी तब तो आप मुझसे बात कर सकती है और में गावं का नहीं हूँ.. आपकी तरह शहर से छुट्टीयाँ मनाने के लिए आया हूँ तो उसने कहा कि ओह मैंने समझा आप भी शायद गावं के ही हो Shaher ki Chhori.

मैंने कहा कि कोई बात नहीं और क्या हम दोस्ती कर सकते है तो वो बोली कि हाँ क्यों नहीं और उसने अपना सीधा हाथ मेरी और बड़ा दिया और मुझे तो बस ऐसा लगा कि मैंने शर्त की पहली सीड़ी पार कर ली हो Shaher ki Chhori और फिर मैंने कहा कि क्या तुम मेरे साथ गावं घूमने चलोगी तो वो बोली कि क्या तुम मुझे यह पूरा गावं दिखाओगे तो मैंने भी थोड़ा सा अपना अच्छा व्यहवार दिखाते हुए अपने सर को थोड़ा झुककर कहा कि आप जैसा हुक्म करें, तो उसके दोनों होंठ गुलाब की पंखुड़ियों की तरह खुल गये.. वाह क्या हंसी थी और मैंने तो बस मन ही मन सोचा कि लड़की हँसी तो समझो बस फंसी और मैंने उससे कहा कि आज शाम को मुझे यहीं पर मिलना और में तुम्हे अपने मामा के खेत दिखाने ले चलूँगा तो उसने हाँ में अपना सर हिला दिया और में बड़ा ही खुश था Shaher ki Chhori.

फिर वापस लौटकर मैंने मामा को सारी बातें बताई तो मामा ने कहा कि वाह यार तुमने तो पहली ही बॉल पर छक्का मार दिया. मैंने कहा कि अभी तो शतक बनना बाकी है.. बस तुम देखते जाओ और शाम को खेत पर बना हुआ कमरा थोड़ा साफ कर देना तो वो हंसकर बोले कि हाँ भांजे श्री और फिर हम दोनों नहाकर खाना खाकर दोपहर तक ताश खेलते रहे और जैसे ही चार बजे तो मैंने धीरे से मामू को इशारा किया और हम ताश खेलना छोड़कर खेत की और चल दिए.. Shaher ki Chhori फिर वहाँ पर पहुंचकर कमरे को अच्छी तरह से साफ किया और वापस आ गये.

फिर में सीमा का इंतजार करने लगा.. जैसे ही 5 बजे तो मुझे सीमा आती दिखाई दी तो मैंने मामू को इशारा कर दिया और वो मुझसे दूर चले गये. फिर जैसे ही सीमा मेरे पास आई तो उसने अपना हाथ मेरी और बड़ाया और बोली कि चलें तो मैंने कहा कि हाँ बिल्कुल लेकिन आपने अपना नाम अभी तक नहीं बताया और फिर वो हंसकर बोली कि मेरा नाम सीमा है और आपका क्या नाम है? तो मैंने कहा कि मेरा नाम सचिन है और फिर हम दोनों मामा के खेत की और चल दिए और थोड़ी ही देर में हम वहाँ पर पहुँच गये और मैंने उसे अपने मामा के पूरे खेत दिखाए और जब में उसे खेत दिखा रहा था तो खेत के खड्डे में उसका पैर फिसल गया और उसके पैर में थोड़ी सी चोट भी आ गयी.

फिर मैंने उसे हाथ देकर उठाया तो वो उठ गयी लेकिन वो ठीक से चल नहीं पा रही थी तो मैंने कहा कि शायद आपको चोट ज़्यादा लग गयी और अगर आपको बुरा ना लगे तो क्या में तुम्हे अपनी गोद में उठाकर ले चलूं और उस कमरे में पैर पर थोड़ा सा तेल मसल दूँगा तो ठीक लगेगा.
फिर उसने दर्द से कराहते हुए हाँ में अपना सर हिला दिया और जब मैंने उसको अपनी बाहों में उठाया तो मुझे ऐसा एहसास हुआ कि जैसे उसने लोवर के अंदर अपनी पैंटी नहीं पहनी है और में उसको कमरे की और लेकर चल दिया और कमरे में ले जाकर उसको ज़मीन पर ही लेटा दिया और उसका लोवर थोड़ा सा ऊपर करके उसके पैर पर तेल से मालिश करने लगा.
तभी जैसे उसको करंट सा लगा हो और वो ज़ोर से कराह उठी तो मैंने पूछा कि क्या हुआ लेकिन मेरे इतनी बार पूछने पर भी उसने कुछ नहीं कहा और मैंने अपनी थोड़ी सी हिम्मत दिखाई और उससे कहा कि तुम अपना लोवर ऊपर से थोड़ा नीचे कर दो तो में ठीक तरीके से मालिश कर सकता हूँ.

तो उसने एकदम से चकित होकर मना कर दिया और में समझ गया कि मेरा अनुमान बिल्कुल सही है.. उसने अंदर पेंटी नहीं पहनी हुई है तो मैंने कहा कि ठीक है कोई बात नहीं.. Shaher ki Chhori में तो केवल मालिश करने के लिए कह रहा था तो उसने थाड़ा सा शरमा कर जवाब दिया कि नहीं ऐसी कोई बात नहीं है.. वो अंदर मैंने पेंटी नहीं पहनी हुई है तो मैंने मुस्कुराकर कहा कि कोई बात नहीं.. में अपनी आँखें बंद कर लूँगा और वैसे भी अब तो धीरे धीरे अंधेरा होने वाला है तो उसने कहा कि ठीक है, तुम अब अपनी आँख बंद करो और में अपना लोवर उतार देती हूँ और मैंने अपना सर पलट लिया.

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